मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने पर पुलिस अधिकारियों पर ही कार्रवाई हो जाती थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2012 से 2017 के बीच सपा की सरकार में प्रदेश में 815 दंगे हुए थे।बुधवार को पुलिस स्मृति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 के बाद पुलिस के हाथों से राजनीतिक बेड़ियां तोड़ी गईं। अपराधियों, माफिया और दंगाइयों के खिलाफ जीरो टालरेंस की नीति अपनाई गई।उन्होंने मथुरा के जवाहर बाग की घटना का उल्लेख किया। कहा कि वहां पुलिस अधीक्षक मुकुल द्विवेदी और थानाध्यक्ष संतोष यादव को अपने प्राण गंवाने पड़े। योगी ने आरोप लगाया कि उस दौर में पुलिस को अपराधियों पर कार्रवाई करने के बजाय सत्ता से जुड़े लोगों के निजी कामों में उलझाया जाता था। पुलिसकर्मियों के कल्याण के लिए मुख्यमंत्री ने तीन घोषणाएं भी कीं। फील्ड ड्यूटी में तैनात उपनिरीक्षकों और निरीक्षकों का मोटरसाइकिल भत्ता 700 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये प्रतिमाह किया जाएगा। पीपीएस अधिकारियों का वर्दी भत्ता 6,400 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये होगा। फील्ड ड्यूटी में तैनात आरक्षियों और मुख्य आरक्षियों का सिम भत्ता 2,000 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये प्रतिमाह किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने पुलिस शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर बलिदानी पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष में देशभर में 154 पुलिसकर्मी कर्तव्यपालन के दौरान बलिदान हुए। इनमें उत्तर प्रदेश के छह जवान शामिल हैं। शहीदों के आश्रितों को अब तक 425 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी जा चुकी है।



















