योगी सरकार की मंगलवार को कैबिनेट बैठक हुई. इस बैठक में कुल 16 प्रस्तावों पर मुहर लगी है, जिसमें आउटसोर्स निगम बनाने की भी बात कही गई है. इसके अलावा इन प्रस्तावों में नगर विकास विभाग और आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग शामिल है. साथ ही कैबिनेट बैठक में संभल रिपोर्ट को भी पेश किया गया, जिसमें बदलते डेमोग्राफी को लेकर बड़ा दावा किया गया था.योगी कैबिनेट की बैठक में 15 प्रस्ताव को मिली मंजूरी
- नगरीय परिवहन हेतु ई-बसों के सम्बंध प्रस्ताव को मंजूरी,लखनऊ,कानपुर के 10-10 रूटों पर होगा परिचालन
- •उत्तरप्रदेश आउटसोर्सिंग सेवा निगम सम्बंध में प्रस्ताव को मंजूरी.नियमित पदों के सापेक्ष आउटसोर्सिंग भर्ती नही होगी.
- •इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण सम्बंध में 6 वर्ष हेतु इलेक्ट्रॉनिक पॉलिसी को मंजूरी
. नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने बताया कि अभी तक प्रदेश के 15 नगर निगमों में 743 इलेक्ट्रिक बसें चलाई जा रही हैं, जिनमें से 700 बसें ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (जीसीसी) मॉडल पर हैं. इस योजना के अंतर्गत लखनऊ और कानपुर नगर समेत आस-पास के कस्बों में 10-10 रूटों पर 9 मीटर लंबी एसी ई-बसें चलाई जाएंगी. प्रत्येक रूट पर कम से कम 10 बसें अनिवार्य होंगी। कॉन्ट्रैक्ट की अवधि वाणिज्यिक संचालन तिथि से 12 वर्ष की होगी. अनुमान है कि प्रत्येक रूट पर करीब ₹10.30 करोड़ का व्यय आएगा, जिसमें से ₹9.50 करोड़ बसों की खरीद पर और ₹0.80 करोड़ चार्जिंग उपकरणों व अन्य आवश्यक साधनों पर खर्च होंगे. प्रावधान के तहत, बसों का डिजाइन, वित्तपोषण, खरीद, निर्माण, आपूर्ति और अनुरक्षण की जिम्मेदारी निजी ऑपरेटर निभाएंगे. उन्हें 90 दिनों के भीतर प्रोटोटाइप ई-बस उपलब्ध करानी होगी और एक वर्ष के भीतर बस संचालन शुरू करना होगा.




















