रायबरेली (संवाददाता),16 अप्रैल। महाराजगंज तहसील अंतर्गत आने वाला चंदापुर क्षेत्र अब विकास की एक नई दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे इस क्षेत्र में अब शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। चंदापुर रियासत के बड़े राजा कौशलेंद्र सिंह के अथक प्रयासों से यहां हाईटेक डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना की कवायद शुरू हो गई है, साथ ही गरीब एवं मध्यम वर्गीय परिवारों के छात्रों के लिए निःशुल्क कोचिंग सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
यह पहल न केवल शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव लाएगी, बल्कि पूरे क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी नई गति देगी। जानकारी के अनुसार प्रस्तावित डिजिटल लाइब्रेरी पर लगभग पचास लाख रुपये से अधिक की लागत आएगी। इस लाइब्रेरी में 40 से अधिक कंप्यूटर लगाए जाएंगे, जिनमें हाई-स्पीड इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध होगी। इसके अलावा यहां हजारों की संख्या में पुस्तकों की व्यवस्था की जाएगी, ताकि छात्र पारंपरिक और डिजिटल दोनों माध्यमों से अध्ययन कर सकें।
लाइब्रेरी को पूरी तरह आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा, जिसमें ई-लर्निंग, डिजिटल कंटेंट, आनलाइन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के संसाधन और शांत वातावरण में अध्ययन की व्यवस्था शामिल होगी। यह सुविधा विशेष रूप से उन छात्रों के लिए लाभकारी साबित होगी, जो आर्थिक कारणों से बड़े शहरों में जाकर कोचिंग नहीं कर पाते।
गौरतलब है कि चंदापुर क्षेत्र में अधिकांश आबादी गरीब, पिछड़े और दलित परिवारों से आते है। यहां के कई बच्चे प्रतिभाशाली होने के बावजूद संसाधनों के अभाव में अपनी क्षमता के अनुसार आगे नहीं बढ़ पाते थे। लेकिन अब इस नई पहल के तहत उन्हें स्कूल की पढ़ाई के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी उचित मार्गदर्शन मिलेगा।
निःशुल्क कोचिंग की शुरुआत इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस कोचिंग सुविधा के माध्यम से छात्र शिक्षक, पुलिस, पीसीएस, रेलवे और अन्य सरकारी नौकरियों की तैयारी आसानी से कर सकेंगे। इससे न केवल युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे, बल्कि क्षेत्र में बढ़ती बेरोजगारी की समस्या पर भी काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा।
चंदापुर के विकास में कौशलेंद्र सिंह बड़े राजा की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने क्षेत्र में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा जैसे बुनियादी क्षेत्रों में लगातार कार्य किया है। उनके प्रयासों से क्षेत्र में सड़क निर्माण, स्वास्थ्य केंद्र, चिकित्सालय, पुलिस थाने की स्थापना, सौर ऊर्जा प्लांट, तालाबों का सौंदर्यीकरण और मंदिरों का कायाकल्प जैसे कई कार्य सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं।
इसके अलावा भारतीय स्टेट बैंक के लिए भवन निर्माण और ग्रामीण बैंक शाखा का संचालन क्षेत्र में वित्तीय सुविधाओं को सुदृढ़ करने में सहायक रहा है। इन सभी प्रयासों के कारण चंदापुर अब एक पिछड़े क्षेत्र से विकसित क्षेत्र की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
शिक्षा के क्षेत्र में यह नई पहल मुख्यमंत्री को भेजे गए उस पत्र की मांग पूरी होने का प्रमाण है, जिसमें चंदापुर क्षेत्र में कोचिंग संस्थान स्थापित करने की आवश्यकता जताई गई थी। अब जब यह मांग पूरी हो रही है, तो क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हाईटेक लाइब्रेरी और निःशुल्क कोचिंग की सुविधा उनके बच्चों के भविष्य को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अभिभावकों का मानना है कि अब उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा और मार्गदर्शन के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा, जिससे समय और धन दोनों की बचत होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की पहल ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए बेहद जरूरी है। जब छात्रों को उनके अपने क्षेत्र में ही गुणवत्तापूर्ण संसाधन मिलते हैं, तो उनकी सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
यह कहना गलत नहीं होगा कि चंदापुर में शुरू हो रही यह शिक्षा क्रांति आने वाले समय में पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल बनेगी। कौशलेंद्र सिंह बड़े राजा का यह प्रयास न केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए, बल्कि आने वाली पीढि़यों के लिए भी एक मजबूत नींव तैयार कर रहा है।
निस्संदेह, चंदापुर अब केवल एक गांव या क्षेत्र नहीं, बल्कि विकास और शिक्षा का एक उभरता हुआ केंद्र बनता जा रहा है। यह पहल साबित करती है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो और समाज के प्रति समर्पण हो, तो किसी भी क्षेत्र की तस्वीर बदली जा सकती है।
चंदापुर रियासत की पूरी जनता व बड़े राजा कौशलेंद्र सिंह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपना धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों की दूरदृष्टि सोच और सहयोग की भवना से ये सब संभव हो पाया है ।इसके साथ उन्होंने काबिल जिलाधिकारी हर्षिता माथुर को भी धन्यवाद ज्ञापित किया है।
हम आपको बताए तो पिछड़े एवं दलित बाहुल्य इस क्षेत्र में लोग आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं, वहां इस प्रकार की सुविधाओं का उपलब्ध होना किसी वरदान से कम नहीं है। ऐसे में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर तालमेल इस विकास को और अधिक प्रभावी बना रहा है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि जिलाधिकारी की सक्रियता और संवेदनशीलता के कारण ही यह योजना अब वास्तविकता का रूप ले रही है। आने वाले समय में यह पहल न केवल शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाएगी, बल्कि क्षेत्र के युवाओं को नए अवसर भी प्रदान करेगी।
इस प्रकार चंदापुर में शुरू हो रही यह शिक्षा क्रांति, जहां एक ओर बड़े राजा कौशलेंद्र सिंह के प्रयासों का परिणाम है, वहीं दूसरी ओर जिलाधिकारी हर्षिता माथुर के सहयोग से इसे मजबूती मिल रही है।




















