बाल कवियत्री शांभवी वर्मा की कृति ‘हां ! मैं उस भारत की बेटी हूं ‘ का विमोचन समारोह चौधरी दीन दयाल पटेल इण्टर कालेज रतापुर के सभागार में संपन्न हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि एम्स के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ अरविन्द शर्मा थे और अध्यक्षता आई टी आई लिमिटेड रायबरेली के जनसंपर्क और वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी शिव कुमार सिंह ने की। पंचशील कॉलेज में हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ संतोष कुमार विश्वकर्मा वरिष्ठ कथाकार शत्रोहन वर्मा और डॉ शिवराज सिंह विशिष्ट अतिथि थे। समारोह का संचालन डॉ संतलाल विश्वकर्मा ने किया।
सरस्वती जी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और पुष्पा र्चन से प्रारंभ समारोह में स्वागत भाषण करते हुए आदित्य नारायण सेन ने कहा की शांभवी वर्मा की काव्य प्रतिमा भविष्य में और अधिक निखरेगी और वह साहित्य के क्षेत्र में मुकाम हासिल करेगी। मुख्य अतिथि में डॉ अरविन्द शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि कविता सच्चे अर्थों में लोकहित को मुखर करती है। काव्य हमारे मन मस्तिष्क को खटखटाता है और चिंतन के नए आयाम देता है। शांभवी वर्मा की पुस्तक में संग्रहीत कविताएं को भाव की कृषि से उर्वर है और सच्चाइयों का बयान करती है। ये कविताएं जमीन से जुड़कर अपनी बात को मुखर करती है। अध्यक्षीय उद्बोधन में शिवकुमार सिंह ने कहा की शांभवी वर्मा ने अपना रास्ता चुन लिया है। इनकी कविताएं दिल को छूने वाली है। इस पुस्तक को पढ़कर अन्य बच्चे भी प्रेरित होकर साहित्य के क्षेत्र में आएंगे। शांभवी वर्मा की कविताओं से समाज की बेटियों का उत्साह बढ़ेगा।
विशिष्ट अतिथि एवं पूर्व प्रोफेसर डॉ ० शिवराज सिंह ने कहा कि पुस्तक में संग्रहीत कवितायें विभिन्न विषयों को लेकर लिखी गयी हैं जो शांभवी की सर्जनात्मक क्षमता का प्रमाण हैं। डॉ० संतोष कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि शांभवी वर्मा ने छोटी उमर में बड़ा काम करके दिखाया है। इनकी रचनाएँ बालिका विमर्श को आगे बढ़ाएंगी। वरिष्ठ कथाकार शत्रोहन वर्मा ने कहा शांभवी वर्मा ने कविता के मर्म को पकड़ा है और जीवन जगत को साधारण शब्दों को प्रभावित किया है।
विमोचन समारोह को डॉ कहानीकार डॉ रूबी शर्मा सुखराम शर्मा महंत राम केवल वर्मा लहरी सहित अन्य लोगों ने भी संबोधित किया और शांभवी वर्मा को पुस्तक के विमोचन पर बधाई दी।
इसके पूर्व अतिथियों ने शांभवी वर्मा की कृति हां मैं उस भारत की बेटी हूं का विमोचन किया।
अपने संबोधन में कृतिकार कवियत्री शांभवी वर्मा ने कहा की मेरे मन में जो कुछ भी आया उसे मैंने कागज पर उतार दिया। आप सबने इसे कविता की संज्ञा देकर मेरा उत्साह बढ़ा दिया है। मेरे बाबा एम. पी. वर्मा मेरे माता पिता और गुरुजनों के आशीर्वाद से मेरी पुस्तक आपके समक्ष है। कविता का शिल्प मुझे नहीं मालूम लेकिन ये कविताएं मेरे दिल की पुकार है। मुझे अभी लम्बा सफर तय करना है।
इस अवसर पर संजय वर्मा सिम्पा वर्मा अजय वर्मा लक्ष्मी वर्मा शिवकुमारी तथा पार्वती आदि उपस्थित थी।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन एम. पी. वर्मा ने किया।






















